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वेंकी रामकृष्णन के उद्धरण

कल्पना की यह विफलता हम तक व्यक्तिगत रूप से भी फैली हुई है। भले ही हम यह जानते हैं कि हम बूढ़े भी होंगे और मरेंगे भी, फिर भी अपने रोज़मर्रा के जीवन में हम यही सोचते रहते हैं कि हम अमर हैं। बशर्ते, हम गंभीर रूप से बीमार न हों।

अनुवाद : अमित कुश