Font by Mehr Nastaliq Web

श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

जो सत्य का प्रचार करने में अपने महत्व की बाते कहता है; एवं हर समय अपने को लेकर ही व्यस्त रहता है और नानाप्रकार से कायदा करके अपने को सुंदर दिखाना चाहता है, जिसके प्रत्येक अंग-संचालन में, झलक-झलक में अहंकार झलकता रहता है, जिसके प्रेम में अहंकार, दीनता में अहंकार है, विश्वास में, ज्ञान में, भक्ति में, निर्भरता में अहंकार है—वह हज़ार पंडित हो, और वह चाहे ज्ञान-भक्ति की जितनी भी बातें क्यों न करे, निश्चय जानो यह ढोंगी है। उससे बहुत दूर हट जाओ, उसकी बातें मत सुनो, किसी भी तरह उसके हृदय में सत्य नहीं है, मन में सत्य नहीं रहने से भाव कैसे आएगा?

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद