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गणेश शंकर विद्यार्थी के उद्धरण

जीवन काल में लोकप्रियता पा लेना या मरने के दसों वर्षों के पश्चात; लोकपूजित होना भी जीवन की महत्ता और सत्यपरता का द्योतक अवश्य है, परंतु इस प्रकार जीवन-काल में और मरणोपरांत भक्ति-भाव को अपनी ओर खींचे रहना, जिस पुरुष के व्यक्तित्व का एक सहज गुण हो, उसकी उच्चता में किसी को संदेह हो ही नहीं सकता।