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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

जितना जीवन-विवेक रामचरितमानस में है, उतना मेरी दृष्टि से किसी महाकाव्य में नहीं है। हर अर्धाली का आधा हिस्सा नीति और जीवन-बोध का है।