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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

जिन मंत्रियों के भ्रष्टाचार की रिपोर्ट रोज़ अख़बारों में छपती है, उनके मरने पर उनके 'शोक' में छुट्टी हो—कैसी हास्यास्पद बात है।