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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

जिसमें न पूर्वजन्म घटित होता है न परजन्म, न मृत्यु न आवागमन। जिसमें हम सदा एक होकर रहे हैं, और रहेंगे—उसी ईश्वर की उपासना करो और अन्य सब मूर्तियाँ तोड़ दो।