Font by Mehr Nastaliq Web

विनोबा भावे के उद्धरण

जिसकी जो वास्तविक वृत्ति होगी, उसी के अनुसार उसका धर्म होगा। श्रेष्ठ-कनिष्ठ, सरल-कठिन का यह प्रश्न नहीं है। विकास सच्चा होना चाहिये। परिणति वास्तविक होनी चाहिए।