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शम्स तबरेज़ी के उद्धरण

जिसका संसार उसका अपना है, उसका कोई दुश्मन कैसे हो सकता है? और जिसका संसार उसका नहीं है, उसका कोई दूसरा दोस्त कैसे हो सकता है।

अनुवाद : सरिता शर्मा