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गणेश शंकर विद्यार्थी के उद्धरण

जिस प्रकार प्रातःकाल की लालिमा का मंद समीर; आगे प्रस्फुटित होने वाले प्रकाशमान दिनमणि के पूर्ण तेज़ का सूचक होता है, उसी प्रकार आदर्शवादी का आशामय जीवन; अपने इष्ट की मूर्ति को अपने हृदय में रखता हुआ, संसार के विपुल तेजमय कल्याण का सूचक होता है।