जिन्हें तुमने चालकरूप में मनोनीत कर लिया है, उनसे अपने हृदय की कोई बात गोपन न करो। गोपन करना उन पर अविश्वास करना है, और अविश्वास में ही है अधःपतन। चालक अंतर्यामी हैं, यदि ठीक-ठीक विश्वास हो, तो तुम कुकार्य कर ही नहीं सकोगे। और यदि कर भी लोगे तो निश्चय ही स्वीकार करोगे। और गोपन करने की इच्छा होते ही समझो, तुम्हारे हृदय में दुर्बलता आई है एवं अविश्वास ने तुम पर आक्रमण किया है—सावधान हो जाओ, नहीं तो बहुत दूर चले जाओगे।
अनुवाद :
श्रीरामनंदन प्रसाद