Font by Mehr Nastaliq Web

जे. कृष्णमूर्ति के उद्धरण

जहाँ प्रेम है, वहाँ करुणा भी है तथा करुणा की एक अपनी प्रज्ञा है। करुणा ही प्रज्ञा का सर्वोत्तम रूप है, न कि विचार, धूर्तता और छल-कपट की बुद्धिमत्ता।

अनुवाद : हरीश