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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

जहाँ कुछ भी अशुभ नहीं है; सब शुभ ही शुभ है, ऐसे संसार में वास करने की कल्पना—भारतीय नैयायिकों के अनुसार दिवास्वप्न देखना है।