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शम्स तबरेज़ी के उद्धरण

जहाँ एक ओर हर व्यक्ति; इस दुनिया में अपना पूरा जीवन लगा कर कुछ बनना चाहता है और फिर उसके मरने के बाद जो कुछ बचता है, वहीं दूसरी ओर एक सच्चा सूफ़ी इस दुनिया से कुछ नहीं चाहता—इस जीवन से हमें शून्य महत्वाकांक्षाएँ रखनी चाहिए।

अनुवाद : सरिता शर्मा