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रवींद्रनाथ टैगोर के उद्धरण

जगत् के सृष्टि-कार्यों में जैसे उत्ताप महत्त्वपूर्ण है, वैसे ही मानव जीवन के गठन में दुःख भी एक बहुत बड़ी रासायनिक शक्ति है।