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श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

जभी देखोगे; गुरु के आदेश से शिष्य को आनंद हुआ है, मुख प्रफुल्लित हो उठा है, तभी समझोगे कि उसके हृदय में शक्ति आई है।

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद