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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

जब कोई किसान खेत में पानी सींचने की इच्छा करता है, तो उसे अन्य किसी जगह से पानी लाने की आवश्यकता नहीं होती। खेत के समीपवर्ती जलाशय में पानी संचित है, बीच में बाँध रहने के कारण पानी खेत में नहीं आ पा रहा है। किसान उस बाँध को खोल भर देता है और बस, पानी गुरुत्वाकर्षण के नियमानुसार, अपने आप खेत में बह आता है। इसी प्रकार सभी व्यक्तियों में सब प्रकार की उन्नति और शक्ति पहले से ही निहित है।