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कुँवर नारायण के उद्धरण

जब हम साहित्य या कलाओं में रचना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करते हैं; तब हम स्वतंत्रता के उसी आशय को केंद्र में रखते हैं, जिसका संदर्भ मनुष्य की संपूर्ण चेतना है, उसकी केवल राजनीतिक चेतना नहीं और स्वतंत्रता के इस अर्थ को मैं राजनीतिक से कहीं ज़्यादा बड़ा मानता हूँ।