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कुँवर नारायण के उद्धरण

जब भी एक नया काव्यांदोलन शुरू होता है; सबसे पहले उसकी भाषा रूढ़ होने लगती है, जिससे एक सशक्त कवि ख़ुद बचना चाहता है।