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रामधारी सिंह दिनकर के उद्धरण

जब भी सौन्दर्य की दुहाई; विद्या की रूढ़ि को जीवित रखने को दी जाती है—सौन्दर्य में विकार भर जाता है। उसकी ताजगी खत्म हो जाती है।