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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

इस संसार में मृत्यु रात-दिन गर्व से मस्तक ऊँचा किए घूम रही है, पर साथ ही हम सोचते हैं कि हम सदा जीवित रहेंगे।