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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

इस संसार की छोटी-सी कीचड़ भरी तलैया में; जहाँ दुःख, रोग तथा मृत्यु का चक्र निरंतर चलता रहता है, क्या है जिसकी इच्छा की जा सके?