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गणेश शंकर विद्यार्थी के उद्धरण

हम केवल यही चाहते हैं कि अपनी दशा न भूलें, मृगतृष्णा हमें पथ से भ्रष्ट न करे और हममें न्याय और अन्याय; साधु और असाधु के अंतर का ज्ञान, इसलिए जाग्रत रहे कि हम धोखा खाकर जातीय चरित्र और उन्नति का नाश न करते रहें।