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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

हम कभी भी किसी नई वस्तु का निर्माण नहीं कर सकते। केवल पुरानी वस्तुओं का स्थान मात्र परिवर्तन कर दे सकते हैं। हमें कोई नई वस्तु नहीं उपलब्ध होती, हम सिर्फ़ वस्तुओं की स्थिति का परिवर्तन करते हैं। बीज ही धीरे-धीरे वृक्ष के रूप में परिणत होता है।