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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

हम अपने दुःखों को दूर करने की कितनी ही चेष्टा क्यों न करें, परंतु फिर भी हमारे जीवन का अधिकांश भाग अवश्यमेव दुःखपूर्ण रहेगा।