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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

हिंदी के बड़े-छोटे कवियों से कहना है कि भाइयो, प्रतिभा को ज़रा खराद पर रखो, बार-बार शब्दों की पिटाई कम करो। पंतजी ने दो मात्राओं की कमी देखी, तो 'चिर' धर दिया और हर किसी संज्ञा के पहिले शत-शत लगाना शुरू कर दिया, माखनलाल जी सूझ, पीढ़ी और ईमान के बिना दस वाक्य नहीं लिखते। नए लोग बुजुर्गों से कम-से-कम यह बात न सीखें।