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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

हिंदी का लेखक या तो वास्तव में बुद्धू होता ही है, या बुद्धू बनने के अवसर की ताक में रहता है और सरलता के गर्व के साथ बुद्धू बन जाता है।