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महादेवी वर्मा के उद्धरण

हर युग की अनुश्रुति पुराण पर कल्पना का नया रंग चढ़ा देती है और इस प्रकार हम तक आते-आते यह जीवन-गाथा सत्य, कल्पना, सिद्धांत, आदर्श, नीति आदि का संघात बन जाती है।