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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

हर जाति या राष्ट्र का अपना-अपना अलग ईश्वर मानना और दूसरों को भ्रांत कहना, एक अंधविश्वास है, उसे अतीत की वस्तु हो जाना चाहिए—ऐसे सारे विचारों से मुक्ति पाना होगा।