लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई के उद्धरण
हर बड़े चिंतक ने हमें ये समझाने की कोशिश की है कि कुछ भी अस्तित्व में नहीं और ना ही कोई अंतिम सत्य है।
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