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रवींद्रनाथ टैगोर के उद्धरण

हमें समग्र के लिए अंश का त्याग करना है―नित्य के लिए क्षणिक का, प्रेम के लिए अहंकार का, आनंद के लिए सुख का त्याग करना है।