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वेंकी रामकृष्णन के उद्धरण

हमारे भीतर बुद्धिमानी का ज़्यादातर हिस्सा तीस साल पार करने के बाद आता है। उसके बाद हम अपने तौर-तरीक़ों में ढलते जाते हैं और बुद्धिमान होने के साथ-साथ, प्रतिक्रियावादी होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

अनुवाद : अमित कुश