एक के लिए शायद मांस खाना अनुकूल हो, और दूसरे के लिए फल-फूल पथ्य हो। जो जिसका भाव हो, वह उसी राह पर चले। किंतु जिन आचरणों का पालन उसके अपने लिए हानिकारक है, उन आचरणों के अनुयायियों को अपने मार्ग पर लाने का हठ करना तो दूर रहा, उन आचरणों की निंदा करने का भी उसे कोई अधिकार नहीं।