Font by Mehr Nastaliq Web

कुँवर नारायण के उद्धरण

एक जागरूक साहित्यकार के लिए जीवन की हर रचनात्मक चेष्टा से लिप्त होना; उतना ही रोचक और आवश्यक है, जितना जीवन से लिप्त होना।