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दुर्गा भागवत के उद्धरण

दुर्योधन में क्रूरता की कमी की हिफ़ाज़त हमेशा दुःशासन ने ही की। दुःशासन नहीं होता तो शकुनि के द्यूत के आख़िरी भाग में, द्रौपदी चीरहरण के उस त्रासद प्रसंग में इतना प्रचंड आवेग नहीं आता।

अनुवाद : वासंतिका पुणतांबेकर