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सुधीश पचौरी के उद्धरण

दलित के सत्ता विमर्श में एक कबीर का, एक अम्बेडकर होना भी अगर नहीं भाता; तो इस नव ब्राह्मणवादी पेटूवाद को क्या कहा जाए, जो कुछ प्रगतिशील दिमाग़ों में भी बैठा हुआ है।