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विनोद कुमार शुक्ल के उद्धरण

भीख माँगने वालों में जातीय सहूलियत होती। ख़रीद-फ़रोख्त में जातीय सहूलियत नहीं होती। लोग सस्ती चीज़ें किसी से भी ख़रीदने के लिए तैयार होते थे।