Font by Mehr Nastaliq Web

नामवर सिंह के उद्धरण

'भक्ति-काव्य' को केवल काव्य तक सीमित रखना, उसे अधूरा रखना है। भले ही आरम्भ उसका काव्य के रूप में हुआ है लेकिन अगर आप ध्यान दें कि उसका अन्य कलाओं में भी विस्तार हुआ।