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नामवर सिंह के उद्धरण

भक्ति साहित्य, जात-पाँत के विरुद्ध विद्रोह करता है। जात-पाँत के खंडन का सबसे बड़ा प्रमाण है कि भक्ति भगवान के साथ भक्तों को स्पर्श कराना चाहता है।