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दुर्गा भागवत के उद्धरण

भक्त ईश्वर में लीन होता है, प्रेमी एक-दूसरे में समा जाते हैं, व्यक्ति ध्येय में विलीन होता है—ये घटनाएँ कम दर्जे की न होते हुए भी अपरिचित नहीं हैं।

अनुवाद : वासंतिका पुणतांबेकर