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जैनेंद्र कुमार के उद्धरण

भाग्य के हाथ में सब कुछ है, लेकिन रुकना कभी श्रेयस्कर हुआ है? साँस रुकती है, उसे मौत कहते हैं, गति रुकती है, तब भी मौत कहते हैं, हवा रुकती है वह भी मौत है, रुकना सदा मौत है। जीवन नाम चलने का है।