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रवींद्रनाथ टैगोर के उद्धरण

भारतवर्षीय संहिता में नर-नारी का संयत संबंध, कठिन अनुशासन के भीतर आदिष्ट है—कालिदास के काव्य में वही सौंदर्य के उपकरण में गठित है।

अनुवाद : चंद्रकिरण राठी