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गणेश शंकर विद्यार्थी के उद्धरण

भारतीय जनता को स्मरण रखना चाहिए कि बिना आधार के इमारत नहीं खड़ी हो सकती। मनुष्य कहलाने के अधिकार प्राप्त किए बिना, राजनीतिक सुधारों की माँग—अत्यंत उपहासजनक है और सचमुच में वह कोरा स्वप्न है।