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विश्वनाथ त्रिपाठी के उद्धरण

भारत में जब-जब कोई मानवीय विचारधारा; लोकप्रिय और व्यापक आंदोलन को जन्म देती है, तब-तब उससे प्रेरित साहित्य वर्णव्यवस्था और नारी पराधीनता पर प्रहार करता है।