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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

बाहरी अनुष्ठान की श्रेणी सबसे निकृष्ट है, जहाँ कि मनुष्य के लिए सूक्ष्म विचारों का होना प्रायः असंभव है।

अनुवाद : पण्डित द्वारकानाथ तिवारी