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श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

असत् बात बोलने की अपेक्षा सत् बात बोलना अच्छा है निश्चय, किंतु बोलने के साथ कार्य करना एवं अनुभव न रहा तो क्या हुआ? वायलीन, वीणा जिस तरह वादक के अनुग्रह से बजती तो अच्छी है, किंतु वे स्वयं कुछ अनुभव नहीं कर सकती।

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद