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भर्तृहरि के उद्धरण

अन्यों का मन प्रसन्न करने या उनके मन में झाँकने की अपेक्षा अपना ही मन प्रसन्न करना, अपने ही मन में झाँकना अच्छा होता है। इस प्रकार करने से आत्मज्ञान प्राप्त होता है।