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मनोहर श्याम जोशी के उद्धरण

अक्सर यह देखा गया है कि जिस बड़े व्यक्ति का आपको लम्बा सान्निध्य मिला हो, उसकी कोई अदा, कोई भंगिमा, कोई तक़ियाकलाम या अंदाजेबयाँ—आप चाहे-अनचाहे स्वयं भी अपना लेते हैं।