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श्यामसुंदर दास के उद्धरण

ऐतिहासिक चरित्र-चित्रण में यद्यपि कल्पना का पुट किसी-न-किसी मात्रा में रहता है, पर कलाओं की भाँति इतिहास में कल्पना की अबाध गति नहीं पाई जाती।