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रघुवीर सहाय के उद्धरण

ऐसा नहीं कि एक सामाजिक विद्रोह के बिना एक कलाकार का विद्रोह नहीं हो सकता, परंतु ऐसा है कि यदि कलाकार सामाजिक विद्रोह को पहचानता नहीं, तो वह अपने मनुष्य को भी नहीं पहचानता—वह मनुष्य जिसके पहचानने पर कलाकार सामाजिक विद्रोह को भटकने से बचा सकता है।