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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

अधिकांश मनुष्य पशु से बहुत थोड़े ही उन्नत हैं, क्योंकि अधिकांश स्थलों में तो उनकी संयम की शक्ति, पशु-पक्षियों से कोई विशेष अधिक नहीं।